अगर बेसुध न हुए ,नए वर्ष की सुबह का स्वागत करेंगे जरूर ,दोस्ती न की अंधेरों से ,उजालों से हाथ मिलायेंगे जरूर ,काट न दिए हों अरमानों के पंख .आकाश में उड़ान भरेंगे जरूर .संवेदनाएं रेगिस्तान में न बदली हों ,दर्द से रिश्ता निभाएंगे जरूर ,नागफनी को सींच लिया हो जी भर ,बरगद को सीने से लगायेंगे जरूर ,सबक सीखें हों गलतियों से ,आगत खुशनुमा बनायेंगे जरूर .
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